"He raised me up ''

  " इसीलिए पहले तुम उसके राज्य और धर्म की खोज करो, तो यह सब वस्तुएं तुम्हे मिल जाएगी "

मेरा नाम रणविजय राओ  है | आज मैं आप सभो के सामने मेरी दुःख भरी एवं आप लोगो के लिए एक चेतावनीपूर्ण गवाही बताने जा रहा हूँ | असल में मैं अपने घमंड के बारे में बताना चाहता हूँ जिस के कारण मेरी जिंदगी हमेशा के लिए पाताल लोक में कहीं जा पड़ी | 

बात कुछ वर्ष पहले की है, राजगढ़ का सबसे बड़ा जमींदार एवं सबसे सामर्थी जमींदार के रूप में मेरा वर्चस्व पुरे राजगढ़ एवं उसके आस-पास के क्षेत्रों में व् अनेक राज्यों में फैला हुआ था | मैं इतना अमीर था, की आस-पास के 7 - 8  राज्यों में मुझ से अमीर कोई था ही नहीं | मेरे बराबरी कोई कर ही नहीं सकता था | अगर कोई मेरी बराबरी करने का pryaas  करता, तो मैं उसकी ऐसी हालत करता की बाद में वो मेरी बराबरी करने का ख्याल भी नहीं कर सकता | हर कोई मेरे चरणों में ही रहते थे | राज्य के मुख्यमंत्री से लेकर हर प्रकार के लोग मुझ से डरते थे | कोई मेरे खिलाफ आवाज उठा दे, मैं उसे दुनिया से ही उठवा देता हु | देखा, ऐसा -वैसा इंसान नहीं हु मैं, मौत भी मेरे सामने आने से डरती है | लोगो के दिल के डर का दूसरा नाम हु मैं रणविजय राव 
नोकरो-चाकरों की कोई कमी नहीं है मेरे पास | लोग मुझे जहां भी देखते, डर के मारे उनका सर अपने आप ही झुक जाता है | मेरी एक baat  हमेशा याद रखना - मुझे घिन आती है गरीब, भिखारियों से | दुनिया के बड़े लोगो में मेरा उठना - बैठना चलता  रहता है | अमीरो का शहंशाह, गरीबो को डरा-धमकाकर उनका खुदा कहलाता था मैं रणविजय राव ||  

इस पुरे देश में एक ही मौत का कारण है, एक ही डर है 
एक ही राजा है, एक ही खुदा है वो मैं थे ग्रेट रणविजय राव मैं एक मतलबी इंसान हूँ ...पहले अपना काम फिर देखेंगे की दूसरे का काम करना है या नहीं  ..... 

सब बहुत बढ़िया चल रहा था, लेकिन आजकल मैं सुबह मेरे आलिशान बंगले के बाहर निकलते ही मेरा मूड खराब हो जाता था | क्यूंकि एक भिखारी ना जाने कहा से घूमते-पड़ते मेरे बंगले के बाहर आ गया |
मैंने जैसे की आपको बताया की रणविजय की एक बात हमेशा  याद रखना - मुझे घिन आती है गरीबो - भिखारियों  से ..... यह भिखारी हर रोज मेरे बंगले के दरवाजे के बाहर आकर beth  जाता था | 

वो शहर के हर दरवाजे को छोड़ सिर्फ मुझ महान जमींदार के बंगले के बाहर ही आकर बैठता  था,,, पता नहीं क्या था उसे || ना जाने वो कोनसी मनहूस घडी थी जब वो यहाँ आया था || चलो कोई ना,, आकर बैठता है मेरे बंगले बाहर .... लेकिन ऊपर से खाना मांगता था की रणविजय साहब .. मुझ पर दया करो, और कुछ खाने को दे दीजिये ......| लेकिन मैं क्यों दू खाना ?? है कौन वो, जो उसे मैं खाना दू ?? मैं ऐसो के मुँह नहीं लगता || नहीं... थोड़ा तो समझना चाहिए ना... मैं कहा ?? द ग्रेट रणविजय राव... कहा वो तुच्छ भिखारी........ 
वो मुझे बहुत खराब लगता था ... क्यूंकि बड़े- बड़े लोग मेरे बंगलो पर आते-जाते रहते है, मेरे बंगलो के बाहर भिखारी.... (reputation) खराब हो जाती है....  लोग क्या सोचते होंगे मेरे बारे में || 

ऐसी बात नहीं है की मेने इसे भगाया नहीं,,, मेने अपने bodyguards  के मदद से इसे भगा दिया था.. ना जाने कहा से फिर घूम-फिर कर आ गया वापिस .... 

वो पूरा घावों से भरा रहता था, कीड़े उसके घाव पर रहते थे, मखियाँ मंडराती रहती थी, कुत्ते आकर उसके घावो को  चाट जाते .....छी: - छी: बड़ा गन्दा, निकम्मा इंसान है....

यूँही साल गुजरते गए... उस भिखारी ने अपना डेरा अभी तक जमाये रखा हुआ था | 
लेकिन कुछ दिनों से वो मेरे बंगलो के बाहर दिखाई नहीं दे रहा था | और सुनने में आया की , भूख के मारे उसका इंतकाल हो गया | .. अच्छा हुआ जल्दी मर गया, वर्ण पूरी जिंदगी जीके जाता तो मेरा पीछा ही नहीं छोड़ता वो....शुक्र है...... मेने फिर सबसे पहला काम ही यह किया, वो जहा बैठता था वहां पानी से साफ़ करवाया ...वो पूरी जगह sanitize करवाई ... बड़ा खराब था वो ....बदबू  तो इतनी बुरी ..बता ही नहीं सकता ......!!  औ गॉड !!

उसे स्वर्गदूतो ने ले जाकर अब्राहम की गोद में बिठा दिया....!!!
फिर वो ही बड़े आराम से दिन गुजर रहे थे ...और कुछ वर्षो बाद मेरा भी देहांत हो गया ... ||  
लेकिन मुझे नरकदूतो ने ले जाकर नर्क में डाल दिया | चारो तरफ आग ही आग... ना जाने कैसे- कैसे खतरनाक कीड़े.... ऐसे कीड़े तो उस भिखारी के घावों  में ही नहीं थे... .  
.....मैंने सोचा ये क्या... मुझे जहा होना चाहिए वह मैं नहीं पहुंचा हूँ !! मैंने वहां एक दूत को जाकर बोला... भाई साहब !! आप लोगो ने गलती से मुझे गलत जगह डिलीवर कर दिया है .. मुझे यहाँ नहीं वहां होना चाहिए ...  आपने शायद पहचाना नहीं ..मैं द ग्रेट रणविजय राव ...नाम तो सूना ही होगा न......उसने मुझे एक लिस्ट पकड़वाई - मेने निचे से देखना शुरू किया.... लेकिन ये क्या.... मेरा नाम तो सबसे ऊपर था... नर्कवासियों की लिस्ट में.... मेने उस भिखारी का नाम ढूँढा लेकिन... उसका तो नाम ही नहीं था उस लिस्ट में.... मुझे लगा मेरे साथ अन्याय हुआ है... 

औ !! बहुत खतरनाक जगह है ये तो..... A .C में रहने वाला मैं .... और अब ऐसी जगह.... सहने के बाहर...  
और इसी बीच मेरी  नजर स्वर्ग की और उठी, मेने वहां से देखा की अब्राहम पिता की गोद में कोई बैठा हुआ है | आग की लपटों के बीच से मेने उसे ध्यान से देखा ... औ !! अविश्वसनीय !! अरे !!! ये कैसे हो सकता है ??  वो तो वो गन्दा, निकम्मा , घावों से भरा हुआ व्ही भिखारी है !!!ये कैसे हो सकता है ?? दुनिया में मैं एक महान जमींदार था,,, वो तो एक तुच्छ इंसान था.. मुझे लोग पसंद करते थे... उसे नहीं.... लेकिन ऐसा क्यों ??  मुझे अब पूरा विश्वास हो गया था की मेरे साथ अन्याय हुआ है... मैं यहाँ नहीं वो यहाँ होना चाहिए था... लेकिन यहां तो इसका उलटा हुआ है.... . 


मेने वहां से अब्राहम पिता को पुकारा "" है, पिता अब्राहम !! मुझ पर दया कर उस भिखारी को भेजो की वो मुझे थोड़ा पानी पिलाकर मेरा जी ठंडा करे......
तब मुझे अब्राहम पिता ने जवाब दिआ... है पुत्र !! तू अपनी जवानी में अच्छी वस्तुएं  ले चूका  है  ... तू तब तो अपने को खुदा समझता था ..... तुझे परमेश्वर ने इतना सबकुछ देने के बावजूद तू एक गरीब भिखारी को  एक वक्त का खाना भी नहीं खिला सके.... तूने परमेश्वर की कभी सेवा नहीकी... सिर्फ धन की सेवा  करता रहा, तू लोगो के सामने महान होता गया.. तूने इन आम,गरीबो लोगो को तुच्छ जाना ,,, उन्हें तकलीफे दी ... लेकिन इस भिखारी ने हर बार बुरी वस्तुएं ही पाई है इसने कभी खुद  को परमेश्वर के तुल्य नहीं किआ...  बल्कि उसके सामने दीन रहता था | एक समय यह तेरे सामने पुकारता था.. रणविजय साहब, मुझ पर दया करो... लेकिन आज तू यहाँ.... पुकार रहा. है..... तेरी अवस्था देख...दुनिया में तू गरीबो से घिन करता था... लेकिन आज तू इस भिखारी के हाथ से पानी पिने को भी त्यार हो रखा है... देख तेरी अवस्था... तूने कितना बड़ा पाप किया.... है .. इसीलिए देख अब तू नरक में दुःख भोग रहा है... और ये यहाँ स्वर्ग में शांति पा रहा है | 


उसी वक्त मैं समझ गया... की मेरे साथ कोई अन्याय नहीं हुआ है.... मेने जो दुनिया में किया उसका फल मुझे आज मिल गया है......आज मैं रणविजय भले ही मृत्यु प्राप्त कर चूका हु... लेकिन आप सभा से मेरी इस गवाही से यही सन्देश है - 

1.   मेने जिस प्रकार सिर्फ पूरी जिंदगी धन की ही सेवा की, मैं खुद अपने को खुदा समझ बैठा और उस सच्चे अवर्णित खुदा को भूल गया था .... वैसे आप कभी मत करिये... 
( Luke 16:13 ) हमे सिर्फ परमेश्वर की ही सेवा करनी है... ना की धन की |

2.   मैं लोगो के सामने बड़ा महान इंसान था,,, लेकिन परमेश्वर के सामने एक तुच्छ गिना गया.....
 ये मायने नहीं रखेगा की आप दुनिया की नजर में कैसे हो ?? अच्छे या बुरे ?? लेकिन मायने यह रखेगा की आप परमेश्वर की नजर में कैसे हो ....और इसी के द्वारा आपका निर्णय होगा की आपको स्वार्ग नसीब होगा या नर्क | 
( Luke - 16:15 ) 

3. मैं मेरी जिंदगी में महान होना चाहता था...इसीलिए बड़ा बनता था...लेकिन मेरी इसी वजह से में सबसे छोटा कर दिया गया.... अगर आप बड़े होना चाहते हो... तो आपको पहले नम्र, छोटा होना पड़ेगा... 
( Mathew 23:12 )  


उस गरीब भिखारी लाज़र के लिए...दुनिया  के धनवानों के दरवाजे हमेशा के लिए बंद थे .. जिसके मालिक उसे सिर्फ मामूली धन दे सकते थे ......लेकिन स्वर्ग का दरवाजा...जिसका मालिक उसको सबसे बड़ा धन... अर्थार्त अनंत जीवन दे सकता है.... उस मालिक का दरवाजा हमेशा के लिए उसके ;लिए खुल गया....  

मुझ रणविजय वक्त गुजर गया... अभी आपके पास समय है..... क्रियप्या कर इन ३ शिक्षाओं पर गौर फरमाएं -   यही मेरी जिंदगी की सबसे बड़ी गवाही है .......



और आखिर में लाज़र आपसे कुछ कहना चाहता है 
( लाज़र ) -  मैं अपनी गवाही कुछ सक्षिप्त में कहूंगा - 
                

" You raise me up, so I can stand on mountains
   You raise me up to walk on stormy seas
   I am strong when I am on your shoulders
  You raise me up to more than I can be.......

उसने मुझे योग्यता से बढ़ के दिया, है, मांगने से ज्यादा मिला है मुझे 
मेरे मांगने से पहले, सोचने से पूर्व, वो यहोवा यिरेह बनाकर मेरी जिंदगी में आ गया 
उस खुदा का आज मैं लाज़र सभा के सामने  शुक्र गुजर करता हूँ 



 - Luke (लुका) - 16: 19-31 

- Ashish George 

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