अर्थगर्भित कथन
अर्थगर्भित कथन वे होते हैं जिनके शब्द मात्र ध्वनियों का समूह नहीं होते, बल्कि वे विचारों, भावनाओं और अनुभूतियों के वाहक होते हैं। उनके अर्थ केवल सतही न होकर गहरी परतों में छिपे प्रतीकों और संदर्भों को समेटे रहते हैं। यही कारण है कि एक ही कथन प्रत्येक व्यक्ति के अनुभव, दृष्टिकोण और चिंतन के आधार पर अलग-अलग रूप धारण कर सकता है। कुछ इसे मात्र प्रत्यक्ष अर्थ में स्वीकार करते हैं, जबकि कुछ इसकी गूढ़ता को समझकर उसमें निहित गहरे भावों को आत्मसात कर लेते हैं। हर दृष्टिकोण अपने आप में सही होता है, क्योंकि शब्द स्थिर होते हैं, परंतु उनकी व्याख्या व्यक्ति-विशेष के अनुभवों और संवेदनशीलता पर निर्भर करती है।"
बेपनाह मोहब्बत थी पत्तों को डालियों से,
यहाँ मौसम बदला, पत्तों ने झड़ना शुरू कर दिया।
कल तक जो साए में ठंडी छाँव देते थे,
आज बिखर कर ज़मीं से मिलना शुरू कर दिया।
थी वफ़ादारी या था कोई बंधन अनदेखा,
या फिर वक्त ने हर रिश्ते को परखना शुरू कर दिया।
हवा के झोंकों ने सरगोशियाँ कर दीं,
रिश्तों ने भी शायद बदलना शुरू कर दिया।
जीवन भी तो यूँ ही बदलता है,
मौसमों की तरह…
बेपनाह मोहब्बत थी पत्तों को डालियों से,
मगर हवाओं ने रुख बदला, मौसम ने इरादा बदल दिया।
जो शाखों की बाहों में सिमटे थे बरसों से,
अब ज़मीन की गोद में गिरना शुरू कर दिया।
गिरती टहनियों ने आह भरी, सन्नाटा सा पसर गया,
चमन की रौनक फीकी पड़ी, हर कोना सहम गया।
मगर गिरना भी तो ज़रूरी था, तब ही तो बहार आएगी,
नए पत्तों की कोंपल फूटेगी, फिर से हरियाली मुस्कुराएगी।
हर बिछड़ाव के आगे एक आगाज़ छुपा होता है,
जो बीत गया, वही नई राहों का सबब होता है।
आखिर में, यह हमारा नजरिया है—बदलाव को अंत मानें या नई शुरुआत। पतझड़ के बाद ही बसंत आता है!
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