वो खुदा
आज मेरे शहर मे ना जाने क्या शोर था
जो कुछ अलग था, जो कुछ नया था
मैंने देखा एक भीड़ को
जिनका ध्यान उसी शोर की ओर था
मैं गया वहाँ
देखा खून से लथपथ एक इंसान को
क्रूस का बड़ा भार लिए चला जा रहा था वो
कोई उस पर थूक तो कोई उस पर चिल्ला रहा था
कोई उस के लिए रो तो कोई उस पानी पिला रहा था
उसके जख्मों से बहता लहू, मुझ मे दर्द पैदा कर रहा था
उसका काँटों भरा ताज ना जाने मुझमे डर फैला रहा था
उसके शरीर पर लगते हर घाव उसकी सुंदरता को बर्बाद करते जा रहे थे
यही पीठ पर लगते कोड़े, लोगो को शैतान के बंधन से आज़ाद करते जा रहे थे
वो पाक इंसान, नापाक दुनिया के पापो को लिए जा रहा था
है खुदा इन्हे माफ़ कर, बस यही वह कहे जा रहा था
आज उसका हर अपना उसको ठुकराए जा रहा था
लेकिन वो खुदा का बर्रा था जो मरने को जा रहा था
उसका बहता लहू, मेरी नसो मे नई ताज़गी भरता रहा
उसका रूह का असर , उसमे से निकल के मुझमे समाता रहा
अपनी खूबसूरती को वो बदसूरत करता चला
और मुझ बदसूरत को वो खूबसूरती की तरफ खींचता चला
वो खुदा ने भी एन मौके पर उसको इंकार किया
उसकी वजह से मुझ तुच्छ को उसने स्वीकार किया
वो हमेशा से हमारी परवाह करता रहा था
इसीलिए वो हमारा पर्गवाह बनता चला गया
अनेक रूप मे वो ोगो के सामने आता था
हमेशा का वादा कर उन्हे वह बहुत समझाता था
लेकिन होता नज़रंदाज़ क्योंकि उन्हे कुछ न समझ आता था
अपने लोगो को वो भेज कर अपना प्यार दिखाता था
यहोवा शलोम् बन वो उनसे शांति की बाते करता था
कभी यहोवा यीरे बन कर सब कुछ वो देता था
एल रोई वो बनकर उन्हे अपनी नजरों मे रखता था
पाप की लहरे, लोगो को बहा कर ले जाती है
गहराईयो मे डूबा , अंधकार मे फंसा जाती है
मृत्यु और पाप अब हावी हो जाते गए
इंसान अब उनके कब्जे मे नजर आने लगते गए
आखिर मे वो थक हार कर निर्णय एक लेता है
एलोहिम इमानुएल बन दुनिया मे आ जाता है
हमारे बीच मे रह कर वो हम जैसा ही बन जाता
लेकिन इंसान अब उस रोशनी को पहचान नही पाता है
शैतान ने पूरी कोशिश की उसको हराने की
लेकिन जैसे जैसे वो कदम बढ़ाता
शैतान कांप जाता था
वो लोगो के बोझ को हल्का करता चला गया
अपने उपर दुनिया के पापो का बोझ लेता गया
अपनी जान देकर उसने हम मे जान डाल दी है
एक भटके मुसाफिर को दिशा उसने दिखा दी है
मृत्यु कगार पर खड़े लोगो को आशा उसने दे दी है
पिता और उसके लोगो के बीच दुरी कम कर दी है
खुदावंद और इंसान के बीच रिश्ता वापिस जुड़ गया है
पिता का मुख इंसान की ओर वापिस से मुड़ गया है
अब उसकी मर्ज़ी के अनुसार हम चलते चले जाएंगे
उसके और उसमे हम बनते चले जाएंगे
उसके और उसमे हम बनते चले जाएंगे
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