"अंजाम"
हैं इंसान, आज तु यहाँ है
कल तु कहाँ होगा
तुझे खुद को नही पता
की तेरा कल क्या अंजाम होगा
आज जो वक़्त तेरा अपना लगता है
कल वही कहीं पराया होगा
तुझे जीना है जितना जिले इंसान
तेरा वक़्त भी खुदा ने कहीं ठहराया होगा
एक पल की खुशी के लिए तु दौड़ता बहुत खूब है
अनेक लोगो के इस बीच मे उजाड़ता घर जरूर है
इतना सब करने पर भी दिखाता अपने को मेहबूब है
लेकिन दिल मे तेरे है भरा ना जाने कितना गरूर है
अनेक लोगो के नसीब को तू बनाता बदनसीब है
ना जाने कितनो के साथ तु करता बदसलुक है
बन बेपरवाह ना जाने तु आखिर क्या चाहता होगा
तुझे खुद को नही पता
की तेरा कल क्या अंजाम होगा
बन अंजान ना जाने तु क्यूँ छिपाता अपनी पहचान है
ना जाने तुझ मे भरा इतना क्यूँ गुमान है
वही बड़ी बात है की तू बन जा एक इंसान है
क्यूँ आखिर तू कोशिश करता बन ने की हेवान है
ना जाने क्यूँ पैसों का तू इतना बड़ा दीवाना है
लालच के भूलभुलाय मे तुझे बस लोगो को सताना है
कर गलती खुद, दुसरो पर लगाता अपना इल्जाम है
तुझे खुद को नही पता
की तेरा कल क्या अंजाम है
वक़्त के साथ तु बेच डालता अपना ही ईमान है
ना जाने फिर बन जाता एक इंसान बेइमान है
तुझे क्या लगता है यह सब करके तु पायेगा कोई इनाम है
तुझे खुद को नही पता
की तेरा कल क्या अंजाम है
इतनी छोटी ज़िंदगी ना जाने क्यों बेनाम है
कर कुछ ऐसा की हर जगह फेले तेरा पैग़ाम है
करके कुछ अच्छा काम तु बढ़ायेगा अपना नाम है
करेगा लोगो की इज़्ज़त तो पाएगा अपना मुकाम है
असहाय लोगो का तु साथी बनता चला जा
जितना झुक सकता तु उतना झुकता चला जा
तुझे ऊँचा उठाने के लिए खुदा ने कर रखा अपना इंतेज़ाम होगा
वही तुझे बताएगा की कल तेरा क्या अंजाम होगा
खुदा ही तुझे बताएगा की कल तेरा क्या अंजाम होगा
किसी ने सच ही कहा है
इंसान को कभी अपने वक्त पर घमन्ड नही करना चाहिए
ज़िंदगी है साहब, छोङकर चली जाएगी
मेज़ पर होगी तस्वीर
कुर्सी खाली रह जाएगी
Comments
Post a Comment