उभरता हिंदुस्तान
ख्वाहिशें थी वो हमारे अपनो की
आज़ादी थी बस उनके सपनो की
उड़ाने थी वो मजबूत ज़ज़्बातों की
ऊँचे आसमानों और उपर के सितारों की
बात थी वो बेपरवाह से ज़िम्मेदारी की
खुद हार अपने देस को जिताने की
आज़ादी थी असक्षमान से सम्मान की
यह कहानी है उभरते एक नये हिंदुस्थान की
बात थी बस हमारे बेफिक्रे अरमानो की
बन्द तालो को तोड़ हुकुम खुद फरमाने की
सख्त से सख्त बनकर सीना चौड़ा तान की
कहानी बने उभरते एक नये हिंदुस्थान की
बात थी बस हमारी उन छोटी फरमाइशों की
जो दफ़न हो गई वजह हमारे आजमाइशो की
लड़ते चले गए हम अब वक़्त हमारे बादशाहत की
यह कहानी है उभरते एक नये हिंदुस्थान की
दिख गई अब नई रोशनी देश की पहचान की
नई पीढी है, नया ज़ज़्बा, उडाने नई ऊंचाइ की
अब दुनिया मे बारी हमारी बनने सुल्तान की
यह कहानी है उभरते एक नये हिंदुस्थान की
साहेब!!
हम वो काग़ज़ नहीं जो आग मे राख हो जाते है !!
हम वो नय्या नहीं जो समुंदर मे डूब जाते है
पहाड़ों पर तिरंगा, आसमान मे हमारी ऊँची उड़ाने
ज़मीं पर मिट्टी की खुशबू, समुंदर मे हमारे तैराके
हमे डर नहीं है, सर पर कफ़न जो है
आज़ादी की चींख पुकार, दर्द हम मे दफ़न जो है
यह हिम्मत है मेरे देस की पहचान की
यह कहानी है उभरते
एक नये हिंदुस्थान की
साहेब, हम वो काग़ज़ नहीं जो आग मे राख हो जाते है,
हम वो नय्या नहीं जो समुंदर मे डूब जाते है,
पहाड़ों पर तिरंगा, आसमान में हमारी ऊँची उड़ाने,
ज़मीन पर मिटटी की खुशबू, समुन्दर में हमारे तैराके,
हमे डर नही है, आर पर कफ़न जो है,
आज़ादी की चीख पुकार हम में दफ़न जो है,
यह हिम्मत है मेरे देस की पहचान की
यह कहानी है उभरते एक नए हिंदुस्तान की
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