"He is calling you "

 गवाही -  From Darkness to Light 


मैं माधव सिंह का बेटा बेनी माधव सिंह | एक अन्धा, अपनी किस्मत से हारा हुआ, लोगो का सताया हुआ

एक इंसान, आज अपनी एक गवाही बताने जा रहा हूँ | उस एक वक्त का बखान करने जा रहा हूँ जिसने मेरे कदमो की दिशा बदल दी,अंधकार  से ज्योति  की ओर  राह चला दी, मृत्यु की अवस्था से, मुझे नया जीवन जीने का तरीका सीखा दिया | एक ऐसी घटना, जिसने मुझे प्रतिकूल परिस्थिति से एक अनुकूल सिटीथी में खड़ा क्र दिया  ओर मेरे अंतकरण में  इस कदर हिम्मत दे दी की आज में यह कहने से बिलकुल नहीं डरता/ लजाता की  मैने उस खुदा यीशु को चखा है,उस को पहचना है, उसे अपने जीवन में उतारा है |

मैं एक अन्धा होने के साथ- साथ एक भिखारी भी हूँ | जाहिर सी बात है की लोग मुझे पसंद नहीं करते थे | माँगना मेरी किस्मत पर लिखा था, जो कुछ मांगता थे वो मेरी तरफ दूर से ही भगा कर  दिया जाता था मतलब ये की कोई मुझे अपने करीब आने नहीं देता था |

मैने सुना था की खुदा ने इस कायनात को बहुत सुन्दर बनाया है, अनेक रंगो से भरपूर, लेकिन क्या फायदा मेरी जिंदगी तो सिर्फ काले रंग से रंगी हुई है | 

अनेक लोगो को इच्छा  होती है वो बड़े इंसान बने,अमीर बने, लेकिन मेरी इच्छा अमीर बनने की कभी नहीं हुई, मेरी इच्छा सिर्फ इतनी ही थी की मैं अपनी आँखों से देखना चाहता था|

और हाँ एक और बात- मैं हमेशा अपने साथ एक चादर रखता था, जिसे मैं अपनी सौभाग्यशाली चादर मानता था मतलब lucky | मैं उसे अपने से अलग नहीं होने देता था हर वक्त मेरी सीने से लगाए रहता था| उस चादर पर मुझे बहुत  विश्वास था | 

एक दिन मैं रोजाना की ही तरह सड़क के किनारे बैठ कर भीख मांग रहा था | अचानक एक ज़ोर का शोर होने लगा, पता नहीं क्या हुआ ? की लोग चिल्लाने लगे थे |  धीरे धीरे शोर बढ़ रहा था | हां ये सही है की रोजाना भी शोर होता है, लेकिन आज का शोर कुछ अलग था | कोई लोग इधर जा रहे थे,और कोई उधर |

मैंने लोग से पूछा " भाई साहब, आज क्या बात है, आज कोई त्योंहार वगेरा है क्या, जो सब कोई इतनी ख़ुशी से चिल्ला रहे है " | उस भीड़ में से ही किसी का जवाब मेरी पास आता है की यीशु नासरी यहाँ से गुजर रहे है |

मैंने यीशु के बारे में सुना हुआ था की वो लोगो को चंगा करते है, और अनेक चमत्कार करते है |
फिर क्या मुझे तो सिर्फ एक मौका चाहिए था, अब मौका आया ही है तो मैं इसे कैसे जाने दे सकता हूँ | 
यार !! मुझे देखना था , मुझे उस खुदा की करिश्माई कलाकारियों एवं इस खूबसूरत कायनात  को देखना था | 
मैंने ज़ोर ज़ोर से चिल्लाना शुरू क्र दिया " है यीशु नासरी, दाऊद की संतान , मुझे पर दया कर "| 
लेकिन बहुत लोगो ने मुझे डांटा, कुछ ने मुझे मारा , मुझे नीचे गिराया , और फिर  मुझे से कहा " की तुझे उसको पुकारने का अधिकार नहीं है" | 
लेकिन, मैं यह मौका नहीं जाने देना चाहता था, मैं इस वक्त को नहीं खोना चाहता था| इसीलिए मैं और जोर से चिल्लाने लगा " है, दाऊद की संतान, मुझ पर दया कर "........मेरे इतना चिल्लाने पर भी मुझे लगा कुछ नहीं होगा, मैंने सोचा मेरी आवाज़ यीशु तक नहीं पहुंचेगी |
लेकिन अचानक, वह सनाटा छा गया, मैं डर गया, क्यूंकि मुझे लगा यीशु चले गए है, निराशा मुझे चारो और घेरने लग गई , अपनी इच्छा पूरी न होने का  डर , आशा फिर निराशा में बदलने का  भय मेरी आँखों से आंसुओ के रूप  बहने शुरू हुए , मैं रोने लगा, मेरा दिल भर गया | दुनिया से मेरा नाता तो पहले ही टूटा हुआ था , मेरा कोई नहीं था , एक मिला था, लेकिन अब मुझे वो भी जाता हुआ महसूस हुआ | 

लेकिन अचानक एक जन मेरे पास आया, उसने मुझे से कहा " वो तुझे बुलाता है " 
मेरी ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा , मैं बहुत खुश हो गया , मैने एक बार फिर अपने अंदर ताजगी को महसूस किया , meri  जिंदगी में निराशा का जो सूरज अस्त हो गया था, वो फिर आशा के सूर्य के रूप में दूसरी और से फिर उदय हो चला  | आज तक किसी ने भी मुझे अपने करीब नहीं बुलाया , लेकिन वो खुदा ने आज मुझे अपने करीब बुलाया है | 

main उठा, मैने वो अपनी ( lucky ) चादर फेंक दी, क्युकी अब मुझे उसकी जरूरत नहीं थी, 
मैं  यीशु के पास गया , यीशु ने मेरे से पूछा तुझे क्या चाहिए, मैंने कहा की है प्रभु मैं देखना चाहता हु | यीशु ने मेरी आँखों पर अपने पवित्र हाथ रखे और कहा " तेरे विश्वास ने तुझे चंगा किया है और तुरंत मैं देखने लगा | 

मेरी गवाही सुन ने वाले सभो से मैं बस इतना कहना चाहता हु, जिस इंसान को आज तक किसी ने नहीं अपने करीब न ही बुलाया, उस रहीम खुदा ने बुलाया | हम दुनिया की नजर में कैसे है ये मायने नहीं रखता, लेकिन मायने ये  रखता  है की हम परमेश्वर की नजर में कैसे है | उसने  मुझे घूरे से उठा कर चट्टान पर खड़ा किया, उसने मेरे गम के आंसू को पांच कर हसने का मौका दिया | उस प्यारे खुदा ने मुझे आँखे दी, मुझे अन्धकार से ज्योति की  राह पर लाकर खड़ा कर  दिया की मैं खुद एक ज्योति की संतान बनकर, ज्योति के पिता की सेवा कर सकूं | उसने मेरी कमियों को पूरा किया, मुझे सबकुछ दिया और मैने उस खुदा को अपनी जिंदगी दे दी, जो उसने मुझ से किया उसके बराबर नहीं है | 
आज मैं उस खुदा का धन्यवाद  करता हु और चाहता हु की आप भी  उस खुदा पर विश्वास करे,
 वो तो हमेशा से तैयार  है आपको अपनाने के लिए, लेकिन क्या आप तैयार  है ??

Mark (मरकुस ) - 10: 46-52 

- Ashish George 





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