"How to respond the God's blessings"

 गवाही -  एक तुच्छ आभारी कोढ़ी 

मेरा नाम चंद्रप्रकाश है | मैं आज आपको मेरी गवाही बताना चाहता हूँ, अर्थार्त  उस आश्चार्यकर्म को आप से साझा करना चाहूंगा जिसने मेरी जिंदगी रूपी डूबती नय्या को एक किनारा दे दिया ,और मुझ असहाये इंसान को सहारा दे दिया 

दुनिया की नज़र में मेरे में दो कमियां थी | पहली ये, की मैं एक सामरी व्यक्ति हूँ | लोग उस वक्त हम सामरियों से बहुत नफरत किया करते थे | लोग जब हमे किसी मार्ग पर गुजरते देखते तो वो अपने मार्ग बदल लिया करते थे | हमे देखते ही हम पर पथराव कर दिया जाता था | हम उन दिनों लोगो की नजर में सब से तुच्छः जाती के थे  जिनसे लोग बात करना तो दूर देखना भी पसंद नहीं करते थे | लोगो और हम सामरियों में कुछ भी सम्बन्ध नहीं थे | 

मेरी दूसरी कमी थी की मैं एक कोढ़ी था | उस वक्त नियम थे की जिनके भी कोढ़ हो वो नगर से बाहर ही रहेगा | लोग मुझे और मेरे दस दोस्तों को शहर में नहीं आने देते थे | दोनों ही अवस्था में मैं एक तुच्छ इंसान था और दोनों ही अवस्था में हमे समाज में आने की इज़ाज़त नहीं थी | 

हम दसो दोस्त ये सोच कर की हमसे कोई बात करने वाला नहीं है, हमे कोई अपने नजदीक नहीं आने देता बहुत दुखी थे | इसीलिए कभी कभी हमे अपने नसीब  पर बहुत दुख होता था  ख़ास कर मुझे | 

ऐसे ही नगर के बाहर हमारे दिन गुजरते गए | .... 

लेकिन एक दिन हमने एक ऐसे शक्श के बारे में सुना जो लोगो को चंगा करता है | वो और कोई नहीं यीशु नासरी था | हमने इस यीशु के पास जाने का फैसला किया | हम यीशु के पास गए हमने यीशु से विनती की प्रभु आप हमे चंगा कर दीजिये | यीशु ने हम से कहा की जाओ, जाकर अपने आप को याजको को दिखाओ | हम एक बार तो डर गए , क्यूंकि याजक लोग ही है जो सबसे ज्यादा हमे देख पथराव करते है और फिर मैं तो कोढ़ी के साथ साथ एक सामरी भी था तो मुझ पर तो दोगुना पथराव | लेकिन फिर भी हम यीशु की बाते मान कर चल पड़े याजको के पास जाने के लिए |

लेकिन अब जो पल मेरी और मेरे दोस्तों की जिंदगी में आने वाला थे उसकी कल्पना हमने हमारे स्वप्नों में भी कभी नहीं की थी | हम याजको के पास पहुँचने से पूर्व ही चंगे हो गए | हम बहुत खुश हुए क्यूंकि हमारा शरीर भी आज सामान्य लोगो की ही तरह हो गया था | मैंने मेरे दोस्तों से कहा " आओ हम यीशु को जा कर धन्यवाद देते है क्यूंकि उनकी वजह से आज हम चंगे हो गए है | लेकिन मेरे दोस्तों ने फिर कभी यीशु को याद नहीं किया और अपने अपने रास्ते चल पड़े | लेकिन मुझ से रहा नहीं गया मैं चल पड़ा उस खुदा के पास जिसके के कारण आज में कोढ़ से चंगा हो गया | मैं उसके पास गया, उसको धन्यवाद दिया हुए उसे दंडवत किया क्यूंकि पहली बार  किसी ने भी मुझ  सामरी व्यक्ति होने के कारण अपने पास नहीं आने दिया लेकिन उस खुदा ने मुझे अपने पास आने दिया  और उसने अपना हाथ बढ़ा कर मुझे उठाया | 

उस दिन मैं समझ गया की दुनिया में कैसे भी इंसान कुयूं ना हो, चाहे अमीर, चाहे गरीब, चाहे ऊँची जाति का चाहे नीची जाति का , कैसा भी क्यों न हो उस परमेश्वर के सामने हम सब एक सामान है |  

मैं चंद्रप्रकाश आज अपनी गवाही बस इतना ही कहना चाहता हूँ परमेश्वर किसी में भी भेदभाव नहीं करता 
वो सिर्फ इस्राएलियों के लिए ही नहीं आया था , उनके लिए ही नहीं मरा था, वो पूरी मानव जाति के लिए मरा था | वो सिर्फ उन का ही परमेश्वर नहीं है वो  मुझ तुच्छ इंसान का भी परमेश्वर है वो मेरे जैसे हर एक इंसान का परमेश्वर है जो दिल से उसकी महिमा करते है | 
और एक और बात, मेरे उन नौ दोस्तों के सामान कभी मत बनो , जो सिर्फ परेशानी या मुसीबते आने पर ही परमेश्वर को याद करते है और उसके पास आते है | हमे हर वक्त चाहिए की हम परमेश्वर को धन्यवाद दे, चाहे आप मुसीबत में हो या ना हो ,चाहे दुःख में या सुख में हमे हर वक्त उस खुदा को धन्यवाद देना चाहिए |  मैं आज भी उस एक पल के उस खुदा को धन्यववाद करता हु, की उसने मुझे वो एक पल दिया , क्यूंकि वो एक पल  मुझे वो नहीं देता तो आज में उस खुदा को नहीं पहचान पाता |  
ये ही मेरी जीवन की सबसे बड़ी गवाही है जिसने मेरी जिंदगी का रूख ही बदल दिया |
 हमारी हर एक सांस उसी के कारण है, हमे नहीं पता हमारे साथ कल क्या होगा, लेकिन वो हमे संभाल के रखता है  इसीलिए हमे  उसको धन्यवाद देते हुए उसकी आराधना करनी चाहिए | वो खुदा हमारी आराधनाओ का लालची नहीं है , वो इन आराधनाओ के योग्य है | ये कहते हुए में चंद्रप्रकाश अपने शब्दो को विराम देता हूँ | धन्यवाद !!!!

  - Luke ( लूका )   - 17 : 11-19
                                                  
 - Ashish George 
                                                                                       





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