" Peter - The Rock"

 


यार, कहीं कुछ भी नजर नहीं आ रहा है | कोई तो उम्मीद की किरण होगी ना.... हमेशा भी तो मैं यहीं इसी जगह आता हूँ | यार,भाई, तू ही बता, मैं  यहीं नहीं आता क्या हमेशा.... लेकिन, आज कुछ नजर में ही नहीं आ रहा है | सुबह होने वाली है,घर जाने का भी वक्त हो गया है | घर पर मैं वादा करके आया हूँ, लेकिन यहाँ तो कुछ मिला ही नहीं, अब घर पर क्या जवाब दूंगा मैं ?? ६ बज गए है... घर पर जरूर सब मेरा ही इंतज़ार कर रहे होंगे, मैं क्या मुँह लेकर घर जाऊँगा ?? मैं उन्हें क्या जवाब दूंगा ??  


ना, यह मैं नहीं होने दे सकता, जब तक मैं हूँ, मैं ऐसा कभी नहीं होने दूंगा | तेरे से पहले मैं मरेगा , लेकिन तुझे मैं मरने नहीं देगा | तेरे लिए मैं  सब कुछ सहने को त्यार हूँ, तेरे लिए अपनी जान तक देने को त्यार हूँ |

तेरे लिए मैं किसी भी हद तक जा सकता हूँ, यहाँ तक की मैं अपने आप को कुर्बान कर सकता हूँ, लेकिन तुझे कुछ नहीं होने दूंगा.....|||तेरे साथ कुछ नहीं होगा....||


अरे !!! मैं उसे नहीं जानता,,, है कौन यह ?? सब झूठ है,,,,, अरे!!! खुदा की कसम !!! मैं उस व्यक्ति को नहीं जानता हूँ !!!  आई शपथ !! मैं उसको बिलकुल भी नहीं जानता , मैंने उसे पहली बार देखा है , और आप लोग उसे जानने की बात करते हो ?? ......मैं उस से पहली बार यहीं देख रहा हूँ.... मेरा और उसका दूर- दूर तक कोई रिश्ता ही नहीं है ....उसे मैं नहीं पहचानता !!!!


अरे.....!!! बस भी करो अब.... छोड़ो !!! अब और कितना चलोगे उसके पीछे-पीछे| वो गया अब , अब उसका वक्त चला गया..... उसका अस्तित्व अब नहीं रहा.... भूल जाओ उसे....अब वो मर चुका है.... वो दुनिया से गुजर गया है छोड़ो उसे अब !!!

मैं तो जा रहा हूँ वापिस, अपने उसी पहले वाले काम पर.... | मेरे साथ कोई आना चाहता है तो आ सकता है .... अपने लिए तो वहो बढ़िया काम है... अपन की दुनिया तो उसी काम में ही तो रखी हुई है....!!! आजाओ......सब .... !!!


यह है मेरी गवाही | एक ऐसी अवस्था,, जब मेरे कदम फिर से उसी राह की  मूढ़ गए थे , उसी काम की और बढ़ रहे थे,जिस काम की और मैं पहली बार असफल हुआ था | जिस सुबह मेरे पास एक आवाज़ पहुंची थी की " क्या तू अपनी नाव मुझे दे सकता है क्या ??  जो asafalta  उस काम मैं मुझे मिली थी,वो मुझे अभी तक की जिंदगी में कभी नहीं मिली थी | 

उस असफलता वाले दिन उस आवाज़ ने मुझ से वादा किया था , जिस आवाज के आने का मक़सद मैं सच में उस रात को नहीं समझ पाया था  था , जिस रात मैंने उसे कहा था की तेरे साथ कुछ गलत नहीं होना चाहिए ,तेरे लिए कुर्बान होने के लिए मैं त्यार हूँ , तुझे कुछ नहीं होगा , मैं हूँ न.......उस रात मैं समझ नहीं पाया  


लेकिन, एक रात को मैं अपने vaade ....वादा क्या....अपने बड़े बोल पर खरा नहीं उतर पाया  

मैंने तीन बार उस आवाज़ का इंकार कर दिया " की मैं उसे नहीं पहचानता , और फिर वापिस उसी काम की और बढ़ चला , जहा से उस आवाज ने मुझे नाम लेकर बुलाया था | मैं तो अपने वादे पर खरा नहीं उतर सका, लेकिन वो अपने वादे पर वफादार रहा |


लेकिन, एक सुह्वानी सुबह ना जाने, एक सामर्थ  मुझ पर  उतरी और मैं बोलने लगा " की मैंने उस आवाज़ को ठुकराकर बहुत बड़ी गलती की ,और आज मुझे उस बात का बहुत पछतावा है |  लेकिन मैं आज आप से भी कहता हूँ " की मन फिराओ, हमे हमारे पापो से माफ़ी वो देगा , जिसने खुद को हमारे लिए कुर्बान कर दिया....||

और जानते हो,उस दिन क्या हुआ?? 3000 लोग उस आवाज़ को पहचान गए, जिस आवाज़ ने उस असफलता वाली रात मुझ से वादा किया था की " डर मत, मैं tujhe  मनुष्य का पकड़ने वाला बनाऊंगा , तू मेरा ही है ".....


जी हाँ !!! आपने सही पहचाना मुझे....... मैं ही वो पतरस हूँ, मैं ही वो योना का पुत्र हूँ , मैं ही वो आवाज़ का इंकार करने वाला शख्श हूँ , जिसको उस आवाज़ अर्थार्त मेरे प्रभु यीशु ने कहा की " तू पतरस , मैं इस पत्थर पर अपनी कलीसिया बनाऊंगा , अधोलोक के फाटक इस प्रबल ना होंगे ' !!!  

और हाँ, आज तक वो आवाज अपने वादे पर बनी हुई है, और हम उस वादे के परिणाम है ||


आज के पतरस तुम हो  जिसको उस आवाज़ ने बुलाया है , और आज के मनुष्य का पकड़ने वाला ठहराया है,,,,,, इसीलिए आओ, मुझ पतरस के साथ ये ज़िम्मेदारी जो उस आवाज़ अर्थार्त मसीह यीशु  ने हमे सौंपी है, उसे बखूबी निभाएं || 



- Gospels


- Ashish George

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