Waqt
"संधान क्षण:
“अधूरे को पूर्ण करता खुदावंद"
आपको पता है, इस दुनिया में हर साल वादे अनेक होते हैं, परंतु इनमें से कितने वादे पूर्ण होते हैं? कितने अपने अर्थ और महत्व को बनाए रखते हैं? उन वादों का पूर्ण होना अक्सर अधूरा रह जाता है। दुनिया के हर रिश्ते में एक ऐसा पल जरूर आता है जब इंसान अपने वादे को पूर्ण करने में असमर्थ होता है। अक्सर ऐसा होता है कि परिस्थितियाँ, समय, और मानवीय कमजोरियाँ हमें उन वादों को निभाने से रोक देती हैं, जिन्हें कभी बड़े उत्साह और सच्चाई के साथ किया गया था | यही असमर्थता रिश्तों में खटास लाती है और उन्हें टूटने पर मजबूर कर देती है। लेकिन, इस बेवफा और अस्थिर दुनिया के मध्य एक ऐसा रिश्ता भी है, जो इन सब से परे है | एक ऐसा रिश्ता जहाँ किए गए वादे अधूरे नहीं रहते, वो समय और हर परिस्थितियों से परे जाकर हर हाल में पूर्ण होते है और यही उस रिश्ते की बुनियाद है। हर व्यक्ति के जीवन में एक ऐसा क्षण आता है जब वह महसूस करता है कि सच्चा सुख और ख़ुशी केवल उस रिश्ते में है, जहाँ न कोई शर्त है और न ही कोई स्वार्थ। जहाँ वादे केवल शब्द नहीं, बल्कि जीवन को बदलने की वास्तविकता बन जाते हैं। हर टूटे वादे और कमजोर रिश्ते के पार, एक ऐसा रिश्ता है जो अनंत है। क्या आपने उस रिश्ते को महसूस किया है? और वही रिश्ते की कहानी में आप सभी के साथ साझा कर रहा हूँ, जहाँ वादों को पूर्ण होता मैंने देखा था, जहाँ अनेक रूकावटो के बावजूद मैंने उसकी महिमा को देखा था, जहाँ मेरे इंतज़ार का फल मुझे मिला था, हाँ ! जिसकी मुझे तलाश थी वो मुझे मिल गया था, खालिख मेरा मालिक मुझे मिल गया | चलो तुम भी चल कर देख लो !!
आज फिर मुझे मालिक के साथ खेत जाना पड़ा। जैसे हर दिन होता है, आज भी मुझे उनके साथ बहुत मेहनत करनी पड़ी। उनका हर सामान मेरे ऊपर लाद दिया गया, और मैं फिर से उनकी मदद में जुट गया। आपने पहचान मुझे? नही? अच्छा! चलो कोई न! मैं हूँ चीकू, जन्म से ही मालिक के साथ हूँ, उनकी सवारी के रूप में। उन्होंने मुझे हमेशा अपने साथ रखा है, और इस यात्रा में, मैंने उनके जीवन की बहुत सी अवस्थाएँ देखी हैं। कभी-कभी, खुशियों के पल होते हैं, जब मैं उनके साथ फसलों से लदा हुआ लौटता हूँ, और कभी-कभी, मैं खाली हाथ लौटता हूँ। लेकिन इन सबके बावजूद, मैं हमेशा मालिक के साथ रहता हूँ, चाहे जीवन में उतार हो या चढ़ाव। उनके संघर्षों और सफलताओं में मैं उनका साथी रहा हूँ। मालिक के पास मेरे अलावा और भी बहुत से भेड़-बकरियाँ हैं। हम सभी एक ही गौशाले में रहते हैं। गौशाला की गर्मी, ठंड, और धूप में हम एक साथ रहते हैं, और मालिक हमेशा हमारी देखभाल करते हैं। हमारे मालिक दयालु किस्म के इन्सान है | वे हमें समय पर खाना देते हैं, हमें अच्छे से देखभाल करते हैं, और थकान होने पर आराम करने का भी मौका देते हैं। सच कहूँ तो, मैं उस खुदा का शुक्रिया अदा करता हूँ जिसने मुझे ऐसा मालिक दिया, जो हमारे भले के लिए हर संभव प्रयास करता है। मैं जानता हूँ कि किसी भी जीव का जीवन आसान नहीं होता, लेकिन मालिक के साथ मेरा जीवन बहुत अच्छा और सुरक्षित महसूस होता है।
और सच में हमारी जिंदगी सुकून से गुजर रही थी उस दिन तक जब हमारे गौशाले में प्रवेश होता है मोंटू और उसके साथियों का| एक दिन मालिक हमारी तरह ही कुछ और जीवो को गौशाले में ले आये | उस दिन के बाद से हमारी जिंदगी एक अलग मोड़ पर आ गई। इन नए जीवों ने आकर हमारी शांत और सुकून भरी जिंदगी को बर्बाद करना शुरू कर दिया। उनका व्यवहार बहुत ही अजीब और हिंसक था। कभी किसी को मारते, कभी किसी को नीचे गिरा देते, कभी झगड़ते रहते और एक के बाद एक शैतानी हरकतें करते रहते थे। उनकी वजह से गौशाले में हर जीव परेशान हो चुका था। हम सब अब उनसे तंग आ चुके थे। मैंने भी उन्हें समझाने की कोशिशे की कि हमें ऐसे नहीं रहना चाहिए, हम सभी ख़ुशी से साथ रह कर जीवन व्यतीत करते हैं । लेकिन, वे लोग तो मानने का नाम ही नहीं ले रहे थे, मानो वे अपनी ही दुनिया में खोए हुए थे। उनका अट्टहास और बेतहाशा बर्ताव हमें तंग करने लगा था। वो हर समय हमें चोट पहुँचाते, और हमारी शांति को छीन लेते। उनकी नासमझी और निर्दयता से हमारी जिंदगी कठिन होती जा रही थी।
खेर, यूँ ही जिंदगी गुजरती चली जा रही थी, दिन ब दिन गुजरते गुजरते महीनो का रूप लेते रहे, महीने सालो का, कभी सुकून के पल, तो कभी अशांत अवस्थाओं से गुजरती हमारी जिंदगी बस बेधड़क चली जा रही थी |
एक सर्द रात, हमारे गौशाले के बाहर अचानक दस्तक हुई। मालिक ने दरवाज़ा खोला तो देखा कि एक आदमी अपनी गर्भवती मंगेतर के साथ दरवाज़े पर खड़ा था। उनकी स्थिति देखकर, मालिक ने उन्हें अंदर बुलाया और देखा कि वह व्यक्ति काफी थका हुआ था, और उसकी मंगेतर भी बहुत परेशान दिखाई दे रही थी। हमने सुना कि वह व्यक्ति कह रहा था, "मेरी मंगेतर को बच्चा होने वाला है। क्या आप हमें अपने गौशाले में कुछ समय के लिए रहनें की जगह दे सकते हैं?" मालिक, जो स्वभाव से दयालु थे, तुरंत उनकी स्थिति को समझते हुए, बिना किसी संकोच के गौशाले का द्वार उनके लिए खोल दिया। उन्होंने कहा, "आप दोनों यहां आराम से रह सकते हैं, हमें कोई दिक्कत नहीं है।" इस पर वह व्यक्ति बहुत आभारी हुआ और उसने हमें अपनी कहानी सुनानी शुरू की। उसने बताया कि वह कई धर्मशालाओं से पूछ चुका था, लेकिन कोई भी उन्हें शरण देने के लिए तैयार नहीं था। उन्होंने कहा, "हमारे पास कोई और विकल्प नहीं था। जब तक हमारी स्थिति नहीं सुधरती, हम कहां जाएं?" उन्होंने अपने साथ बीती सब बातो को हमे बताया, कैसे स्वर्गदूत उनके पास आया था, कैसे पवित्र आत्मा की सामर्थ से यह बच्चा जनम ले रहा है, सबकुछ विवरण में उन्होंने हमे बता दिया | उनकी बातें सुनकर हम सब चुप हो गए। गौशाला में हम सब के लिए यह एक नई उम्मीद की किरण थी, क्योंकि इस तरह के शब्द और घटनाएँ पहले कभी नहीं सुनी थी। मालिक ने हमें शांत रहने को कहा, और हम सब इस नए आगंतुक के बारे में सोचने लगे। यह निश्चित रूप से एक बहुत खास घटना थी, और हम सभी के लिए इसे समझने और स्वीकारने का एक नया अनुभव था।
गौशाले में उस रात एक अनोखा माहौल था। ठंडी हवा चल रही थी, और बाहर आसमान तारों से भरा हुआ था। उसी रात, वह समय आ गया जब उस स्त्री ने एक सुंदर बच्चे को जन्म दिया। उसका नाम "यीशु" रखा गया। हम सब बेहद खुश थे। ऐसा लग रहा था मानो कोई चमत्कार हुआ हो। उस छोटे से बच्चे को देखने के लिए हर कोई उत्सुक था। सभी जीव—गायें, भेड़ें, और बकरियाँ—धीरे-धीरे उसके पास जाने लगे। वे बच्चे और उसकी माँ को घेरकर खड़े हो गए, जैसे वे भी अपनी उपस्थिति से इस पवित्र क्षण को सम्मानित करना चाहते हों। मैं भी बच्चे को देखने के लिए उत्सुक था। मेरी धड़कनें तेज हो रही थीं, और मन में एक अजीब-सी खुशी थी। मैंने भी हिम्मत जुटाई और बाकी सब के बीच से आगे बढ़ने की कोशिश की। लेकिन तभी मोंटू और उसके शरारती साथी आ गए। उन्होंने मुझे रास्ता देने के बजाय बार-बार पीछे खींच लिया। "मुझे भी बच्चे को देखना है," मैंने उनसे विनती की। "यहां जगह कम है। तुम वहीं रहो," उन्होंने बेरुखी से कहा। मोंटू और उसके साथियों ने मुझे हर बार पीछे धकेल दिया। मेरी हर कोशिश बेकार जा रही थी। मैं बार-बार कोशिश करता, लेकिन वे मुझे जाने नहीं देते। मुझे लगा जैसे यह खुशी मेरे लिए अधूरी रह जाएगी। सच में बच्चे के आस-पास जो हलचल थी, वह कमाल की थी, और वो मुझे अपनी तरफ आकर्षित कर रही थी। उसकी माँ उसे प्यार से गोद में थामे हुए थी, और उसके पिता उसे आशा और गर्व भरी नज़रों से देख रहे थे। आस-पास के जीव भी खुशी से झूम रहे थे, मानो वे भी इस चमत्कार का हिस्सा बनकर धन्य हो गए हों। लेकिन मेरे लिए यह खुशी अधूरी रह गई। मैं दूर से ही उस बच्चे की झलक पाने की कोशिश करता रहा, लेकिन सफल नहीं हो पाया। समय बीत गया, और धीरे-धीरे सब कुछ शांत हो गया। उस रात, मैं एक कोने में अकेला बैठा सोचता रहा। मुझे इस बात का अफसोस था कि मैं उस पवित्र बच्चे को देख नहीं पाया। काश एक झलक मिल जाती उस बच्चे के!! अफ़सोस...... मेरा भाग्य..... मोंटू को पता नही क्या दिक्कत थी मुझ से..
खेर वक़्त गुज़रता गया, अब हम भी बड़े हो गए और वक़्त के साथ मेरे भी एक प्यारा सा बच्चा हुआ, और मैंने उसका नाम बड़े प्यार से ट्रेवो रखा जिसका अर्थ है “सवारी”. ट्रेवो मेरी जिंदगी का सबसे खूबसूरत तोहफा था। उसकी मासूमियत, उसकी नादानियाँ, और उसका लगाव मेरे दिल को सुकून देता था। मैं उसे अपने अनुभवों और जीवन की सीख सिखाता था। की कैसे परमेश्वर हमे संभालता है, कैसे वो सबकुछ को पूरा करता है वगेरे वगेरे | ट्रेवो मेरी बातों को बड़े ध्यान से सुनता था। उसकी आँखों में चमक और दिल में जिज्ञासा होती थी। कभी-कभी वह मुझसे पूछता, "पिताजी, अगर परमेश्वर हमें इतना प्यार करते हैं, तो उन्होंने हमें गधा क्यों बनाया?" मैं उसकी मासूमियत पर मुस्कुराता और कहता, "बेटा, यह सवाल सबसे अहम है। परमेश्वर ने हमें गधा इसलिए बनाया क्योंकि हममें धैर्य, मेहनत, और विनम्रता है। इन सभी बातों के बीच, मेरा लक्ष्य हमेशा यही था कि ट्रेवो यह समझे कि जीवन में आने वाली हर चुनौती, हर संघर्ष, और हर अवसर परमेश्वर के प्रेम और उनकी योजना का हिस्सा है। यूँही हम दोनों अपनी जिंदगी सुकून से जीते थे |
लेकिन एक दिन हमारे गौशाले में कुछ लोग आये | वो किसी गधे के बच्चे की तलाश में थे जिसकी जरूरत थी उनके कोई गुरु को | मालिक ने कुछ देर सोचा और फिर ट्रेवो की ओर इशारा किया। "यह गधा तुम्हारे काम के लिए सबसे सही रहेगा," उन्होंने कहा। उनकी बात सुनते ही मेरे दिल में हलचल मच गई। ट्रेवो, जो मेरे दिल का टुकड़ा था, जन्म से लेकर आज तक मेरे साथ ही रहा था। मैंने उसे पल-पल बड़ा होते देखा था, उसकी हर शरारत, हर सीख, और हर कदम मेरे लिए खास था। मेरे मन में चिंता थी—क्या वे लोग उसका ठीक से ख्याल रख पाएंगे? क्या ट्रेवो मुझसे दूर रहकर खुश रह पाएगा? मुझे याद आया कि कैसे मैंने उसे अपने अनुभवों और जीवन की सीख सिखाई थी। लेकिन अब, जब उसे अपने पंख फैलाने का समय आया, मेरा मन उसे जाने देने के लिए तैयार नहीं था। मैंने मालिक से विनती की, "क्या हम किसी और को नहीं भेज सकते? ट्रेवो अभी छोटा है।" लेकिन मालिक नही माने | मैंने ट्रेवो को अपने पास बुलाया। उसकी मासूम आँखों में मुझे नादानी और डर दोनों दिखाई दीं। शायद वह यह नहीं समझ पा रहा था कि मैं इतना परेशान क्यों हूँ। मैंने उसे प्यार से गले लगाया | और वे लोग ट्रेवो को लेकर चले गए | मन उदास था, आंसू रुक गए थे, दर्द के भार में नज़रें झुक गए थे, रोना चाहता था, मगर आंसुओं ने बगावत करदि थी, दिल ने ख़ामोशी के साथ दर्द की इबादत करदी थी | लेकिन कहते है न की परमेश्वर जो करता है सब अच्छे के लिए करता है |
और सच में मेरे दोस्तों, आपको पता है ट्रेवो कहा गया है – मैं बताता हूँ | वो लोग ट्रेवो को अपने गुरु यीशु के पास ले गए | पहचाना आपने इस यीशु को – यह वही है, जिसे देखने की चाहत मेरी हमेशा से अधूरी थी। यह वही छोटा बच्चा है, जो हमारे गौशाले में एक सर्द रात को पैदा हुआ था। यह वही वो छोटा बच्चा है जो दुनिया के पापो का बोझ अपने उपर लेकर क्रूस पर चढ़ने पर था | जिस अधूरी ख्वाहिश ने मेरे दिल को सालों तक कचोटा, वह आज मेरे बेटे, ट्रेवो, के जरिए पूरी हो रही थी। बचपन में जिसे मैं कभी देख नहीं पाया, आज उसी ने मेरे बच्चे को अपने महान कार्य का हिस्सा बना लिया। मेरे दोस्तों, आप सोच भी नहीं सकते, वह दृश्य कितना अद्भुत था। यीशु ने ट्रेवो पर सवार होकर यरूशलेम में प्रवेश किया। लोग “होसन्ना!” के जयकारे लगा रहे थे, अपनी टहनियाँ और कपड़े जमीन पर बिछा रहे थे, और उनके स्वागत में पलक-पावड़े बिछा रहे थे। यह कोई साधारण दिन नहीं था। यह वह दिन था, जब मसीहा अपने अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य की ओर बढ़ रहे थे। मुझे ख़ुशी होती है की सबसे महत्वपूर्ण कार्य करने जाते वक़्त मेरा बच्चा उस खुदा के काम आ रहा था |
मेरे जीवन में जो सपना अधूरा रह गया था, उस खुदा ने उसे मेरे बेटे के जीवन में पूरा कर दिया। इससे बड़ा आशीर्वाद मेरे लिए और क्या हो सकता था? मैं अब समझ गया था कि परमेश्वर की योजनाएँ हमसे कहीं बड़ी और सुंदर होती हैं। अगर आज आप खुद को छोटा और असहाय महसूस करते हैं, तो याद रखिए—परमेश्वर के हाथों में हर छोटी चीज़ एक बड़ी योजना का हिस्सा होती है।
मेरे दोस्तों यह छोटी सी गवाही के जरिये कुछ बातों को आपके समुख रखता हूँ:
१. हम अक्सर अपने जीवन में परमेश्वर से सवाल करते हैं, "प्रभु, तूने वादा किया था, पर यह वायदे मेरी ज़िंदगी में पूरे क्यों नहीं हो रहे? मेरी प्रार्थनाओं का उत्तर क्यों नहीं मिल रहा?" लेकिन मेरे दोस्तों, सवाल करने के बजाय अब इंतज़ार करना सीखिए। क्यूंकि आज वो परमेश्वर कहता है आपसे की वो हर वायदे और बातें जो तुम्हारी जिंदगी में अधूरे पाएं गए है, आने वाले वक़्त में, आने वाली पीढ़ियों में मैं वो सबकुछ पूर्ण करने वाला हूँ हमें बस धैर्य रखना होगा, उस पर भरोसा करना होगा | क्यूंकि वो सही वक़्त पर खूबसूरत कार्य करने में सामर्थी है जो हमारी सोच और विचारो से परे होता है |
२. हम सभी अपनी ज़िंदगी में ऐसे क्षणों का सामना करते हैं, जब लोग हमें रोकना चाहते हैं, हमारी प्रगति में बाधा डालना चाहते हैं, और हमें कमजोर महसूस कराते हैं। लेकिन, मेरे दोस्तों, यह सोचना बिल्कुल गलत है कि हमारी कहानी वहीं खत्म हो गई है। सच तो यह है कि जब लोग तुम्हें रोकने की कोशिश करते हैं, उसी पल परमेश्वर तुम्हारे लिए एक नई और अद्भुत योजना पर काम करना शुरू कर देता है। वह हर अंधकार को रोशनी में बदलने की सामर्थ्य रखता है। आज जो परिस्थिति तुम्हें असंभव लग रही है, जो डर और निराशा से भरी हुई है, वही कल तुम्हारे जीवन में सबसे बड़ा चमत्कार लेकर आएगी। जो रास्ते आज बंद दिखाई दे रहे हैं, उन्हीं रास्तों पर परमेश्वर ने अपना काम शुरू कर दिया है |
३. मेरी ज़िंदगी में सबसे गहरी सीख यह थी कि एक गधे का जीवन उस खुदा ने मुझे दिया| और उस एक गधे के रूप में मेरा उपयोग किसी राजा, योद्धा, या बड़े आदमी की सेवा में नहीं हुआ। लेकिन मेरे बेटे, ट्रेवो, को वह सम्मान मिला, जिसका मूल्य इस संसार में किसी चीज़ से नहीं आंका जा सकता। उसे खुद परमेश्वर के उद्देश्य को पूरा करने का माध्यम बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। दोस्तों, यह अनुभव मुझे यह सिखाता है कि किसी महान व्यक्ति की सेवा करने से कहीं अधिक मूल्यवान यह है कि हम उस जीवित और सामर्थी परमेश्वर की योजना का हिस्सा बनें। इस संसार में ऊँचाईयों का मापदंड चाहे कुछ भी हो, सबसे बड़ी बात यह है कि हम मिटटी मात्र इन्सान उस खुदा के उपयोगी पात्र बन जाएँ |
४. इन सभी बातों का सारांश यही है, की जब हम वो कर लेते है जो हमे करना होता है, तब परेम्श्वर वो करता है जो उसे करना होता है | जब मूसा इस्राएलियों के साथ लाल समुद्र के पास खड़ा था, लोग उस से शिकायते कर रहे थे, तब वो कहता है, की चुप रहो और परमेश्वर के महान काम को देखो | हमारा काम है चुप्प रहना, तब वो परमेश्वर महान काम करेगा, शिकायती बनकर समय मत गवाएं, बल्कि शुक्रगुजार बनें। अब निर्णय आपका है, क्या आप शिकायत करने वालों में शामिल रहना चाहेंगे या शुक्रिया करने वालों में?
५. आखिर में कुछ पक्तियों के साथ अपनी इस गवाही को खत्म करना चाहता हूँ -
तेरे सब अधूरे लम्हों को पूरा करता हूँ मैं,
तेरी हर दुआ का जवाब खुद लिखता हूँ मैं,
जो दर्द तेरे दिल में छुपा हुआ है कहीं,
उसे अपनी रहमत से मिटा देता हूँ मैं।
तेरे अधूरे ख्वाबों को साकार करता हूँ मैं,
हर गिरे हुए आंसू का हिसाब रखता हूँ मैं,
जो तुझे लगा था कभी मुमकिन नहीं,
उसे मुमकिन बना कर मोहब्बत बरसाता हूँ मैं।
तेरे हर अधूरे सफर को मंज़िल देता हूँ मैं,
तेरे टूटे हुए हौसलों को बुलंद करता हूँ मैं,
जो ग़म तुझसे भारी लगता है आज,
उसी ग़म को तेरा फज़ल बनाता हूँ मैं।
मैं और कोई नहीं, तेरा खुदा हूँ,
तेरे हर दर्द में तेरी दवा हूँ,
तू जब खुद को अकेला समझें,
याद रख, मैं तेरे साथ सदा हूँ,
तू चाहे लाखो शिकवे करे मुझ से,
फिर भी मैं तेरा हमसफ़र बना हूँ,
हर मुश्किल मैं तुझे सँभालने वाला,
मैं और कोई नहीं, तेरा खुदा हूँ |
यह छोटी सी जिंदगी रब्बा के नाम कर दे,
उसी के रास्ते में अपनी मंजिल तलाश ले,
इंसान का अस्तित्व तो नाम भर का होता है जनाब,
उस खुदा में जी, और उसी में खुद को मिटा दे।
मेरे दोस्तों, जीवन में कई बार ऐसा होता है जब हमें लगता है कि सब कुछ हमारे हाथ से निकल गया है, और हमें कोई रास्ता नहीं मिल रहा है। लेकिन हमें याद रखना चाहिए कि परमेश्वर का समय सर्वोत्तम होता है। हमें सिर्फ उस पर भरोसा रखना है और उसके ऊपर विश्वास करना है कि जो वह करेगा, वह हमारे लिए सबसे अच्छा होगा। उसका जवाब हमेशा समय पर और खूबसूरत होता है, बस हमें धैर्य रखना होता है। हमारे जीवन में जब हम खुद को हारते हुए पाते हैं, जब हम दुःख में होते है, जब हम अकेले होते है, तब वह हमें उठाता है, तब वो हम से कहता है की मैं तेरे साथ हूँ, तेरी हर निर्बल अवस्थाओं में मैं तुझे बल दूंगा, तेरे अंधेरो में तेरी रौशनी बनुगा | तू मत डर, मैं तेरे साथ हूँ, जीवन के अंत वक़्त तक मैं तुझे चलाऊंगा | इसलिए, कभी भी हिम्मत न हारें और शिकायते न करे, क्योंकि याद रखे परमेश्वर का जवाब हमेशा सबसे सही और खूबसूरत होगा |
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