WRITER (लेखक)
कुछ शब्द आप से .......................
दुनिया में अनेक तरह की कला है, सभी का अंदाज़ अलग है, सभी का योगदान अलग है |उनके कलाओं में एक कला जो अधिकतर नज़रंदाज़ होती है वो कला है “ लेखक” की कला | लेखक जो अपने मन की बातो को, एक नया मज़बूत रूप देता है, एक ढंग देता है ओर यही
अपनी कल्पनाओ को, अपने सपनो को शब्दों का रूप देना भी अपने आप में एक कला होती है | जैसा कहा गया है की " लिखना, लेखक की ताकत है , और कमजोरी भी ,की वो अपने जज्बातो को शब्दों का रूप जो दे देता है " यह ही तो है एक लिखने वाले की ताकत की उसे अपने जज्बातो एवं अपनी कल्पनाओ को शब्दों का रूप देना आता है , और अगर हम कथाओं को, इंसानों के इतिहास के पन्नो को पलटे तो पता चलता है की इंसानों में हमेशा से यह खूबी रही है की वो जितना खुल कर बोलता है , उस से कई गुना खुल कर वो लिख सकता है व् अपने विचारो को प्रकट कर सकता है |
जैसा किसी ने कहा है की " मेरे शब्द आज़ाद है,मेरे लफ्ज़ आज़ाद है , मेरे अहसासों का समंदर आज़ाद है, मैं लिखता हूँ सकूँ पाने के लिए , मेरी सियाही आज़ाद है ,मेरी कलम आज़ाद है "
यह सच कहा गया है ...लिखने वाले के शब्द आज़ाद परिंदे है, जो अपनी उड़ान भरने के काबिल है | उनका कोई प्रतिरोध नही, उनको कोई रोकने वाला नहीं है, न ही उनको कोई बंद करने वाला है , वो अपनी मर्ज़ी का मालिक है , वो जितनी बड़ी उड़ान भरना चाहता है, वो भरेगा, वो जितना चलना चाहता है, वो चलेगा..... वो अपनी ज़िंदगी का मालिक है ||
यह ही एक शब्द की ताकत है वो इंसान के दिल की गहराई में पहुँचता है , उसे चीरता है ,उसमे अपना असर छोड़ता है | अनेक लेखकों , कवियों ने अपने लेख व् कविताओं से लोगो को नई दिशा दिखने की कोशिश की है , उन्हें अच्छी शिक्षाएं दी है | मैं समझता हूँ की लिखने वाला लिखता इसीलिए है वो लोगो को सही राह दिखाएं , लोगो को जागरूक करे अपने कर्तव्यों के प्रति, उनको परिपक्व बनाये उनके आदतों में, कार्यो में, एवं समाज में |
लेखक उन बातो को सजाता है, उन समयों का निर्माण करता है जो दुनिया के अस्तित्व में नही होती है | उसके मन की सोच, उसकी मन की उपज उसको लेखक के तौर पर परिवर्तित करती है | मन की सोच की कोई रूप रेखा नही होती , उसकी शक्ल सूरत क्या है, कैसी है , हम साधारण लोग नही जानते है , यह सिर्फ भावनाएं होती है जो असल रूप में अस्तित्व में नही है| इन भावनाओं को अस्तित्व में लाना उनको शब्दों का रूप देना, एक स्थिर बुनियाद देना यह परिभाषित करता है एक लेखक के अंदाज़ को, उसकी खूबी को | वो सामान्य इन्सान से अलग सोचता है, अलग एक दुनिया जीता है, ओर अपनी उस अद्वितीय दुनिया से साधारण दुनिया का मिलान करता है |
सोचिये ,
एक ऐसा इन्सान जो हम सभी की भावनाओं को, अनुभवो को पाठ, कविताओं में समेत कर सजा रहा है
एक ऐसा इन्सान जो हमारे दबे ओर अन्तर्निहित विचारो का खुलम खुल्ला बयान कर रहा है
एक ऐसा इंसान, जो देश- देश को एवं उनके अलग अलग बिखरे विचारों को संयोजित करता है यह सब लेखन की भूमिकाएं मिलकर एक लेखक को परिभाषित करते है |
By - Ashish George
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